Sunday, 23 October 2016

Najeeb (नजीब)




Hindu nahi hai, Musalman nahi
Bhagwa nahi hai, wo laal nahi
Wo to ek aam sa insaan hai
Jiski yaha koi 'aukat' nahi
Tum bhi wo aam se insaan ho
Main bhi wo sada ladka huun
Wo bhi hum jaisa hai,
Aur is hi liye wo 'khaas' nahi
Kab tak baantoge khud ko?
Kab tak rokoge khud ko?
Kab puchoge tum us ka pata?
Jab ho jaoge khud bhi laa-pata?
Dekho to ye maa roti hai
Apni bhi to maa roti hai
Ab utho chodho deen ke phande
Siyasat ke sab khel ye gande
Hukmraano se aao puchein hum
Maa kab tak rahe maatam maatam.


हिन्दू नहीं है, मुसलमान नहीं 
भगवा नहीं है, वो लाल नहीं
वो तो एक आम सा इंसान है
जिसकी के यहाँ कोई औकात नहीं 
तुम भी वो आम से इंसान हो
मैं भी वो सादा लड़का हूँ 
वो भी हम जैसा है 
और, इस ही लिए वो ख़ास नहीं 
कब तक बांटोगे ख़ुद को?
कब तक रोकोगे ख़ुद को ?
कब पूछोगे तुम उस का पता? 
जब हो जाओगे ख़ुद भी ला-पता? 
देखो तो ये माँ रोती है 
अपनी भी तो माँ रोती है 
अब उठो छोड़ो दीन के फंदे 
सियासत के सब खेल ये गंदे 
हुक्मरानों से आओ पूछें हम 
माँ कब तक रहे मातम मातम?

Sunday, 9 October 2016

Tanha (तन्हा)



Kamra wahi hai, maiz wahi hai
Hum dono ki saij wahi hai

Pani ki bottle khali hai lekin
Dil ka mere, haal wahi hai

Chand bhi dekho jagmag jagmag
Sitaro ki bhi barat wahi hai

Ghadi ki suiyyan Tik-Tik Tik-Tik
Par tere bin to raat nahi hai

Chai ke dhaabe ab bhi raushan
Logo ka bhi shor wahi hai

Jaane kitne haseen hain in mai
Par tere jaisa koi nahi hai

Jungle ka hiran bade shehar mai
Mera ab kuch haal wahi hai

Tere bin kaisa tha jeena
Mujhko to kuch yaad nahi hai


कमरा वही  है, मेज़ वही है
हम दोनों की सेज वही है 

पानी की बोतल ख़ाली है लेकिन 
दिल का मेरे, हाल वही है 

चाँद भी देखो जगमग जगमग
सितारों की भी बारात वही है 

घड़ी की सुईयां टिक टिक टिक टिक 
पर तेरे बिन तो रात नहीं है 

चाय के ढाबे अब भी रौशन 
लोगों का भी शोर वही है 

जाने कितने हसीं हैं इन में 
पर तेरे जैसा कोई नहीं है 

जंगल का हिरन बड़े शहर में
मेरा अब कुछ हाल वही है 

तेरे बिन कैसा था जीना 
मुझको तो कुछ याद नहीं है